Saturday, June 27, 2015

प्यार और हमारा समाज (Honour Killing)

वीर और सीमा एक दूसरे को बहोत प्यार करते थे। यु कहे की एक दूसरे के लिए जीने मरने की कसमे खा चुके थे। प्यार होता ही ऐसा है की लोग अपनी जान तक की परवा नहीं करते, बशर्ते प्यार सच्चा हो।
पता था दोनों को अपने प्यार का अंजाम! पर वह उमीद ही थी जो दोनों के आने वाले कल को लिखने वाली थी।
अलग अलग जाती के थे दोनों। प्यार करते वक्त ये सब कौन सोचता है भला! अरे!भाई प्यार करता कौन है? वो तो बस हो जाता है। इन दोनों को भी हो गया था।
दोनों ने अपने अपने घरवालो को बताया। मानो जैसे पहाड़ टूट पड़ा। सीमा को तो ऐसे पिटा गया जैसे वह बेटी न होकर कोई भयावह गुनेगार हो। अचानक से जैसे दोनों के लिए अपने ही पराये हो गए। और सीमा के लिए तो मानो कालापानी की सजा ही मिल गई। अरे भाई लड़की थी न वो! और हमारे हिंदुस्तान में लड़की का प्यार करना यानि सबसे कलंकित गुनाह! कितनी घटिया सोच है ना?

दोनों ने भाग के कोर्ट में शादी कर ली। पर दोनों उस बात से अंजान थे की आगे उनकी जिंदगी में क्या तूफान आने वाला है।
सीमा के चाचा का फोन आता है। मिलाना था उसे, धूम धाम से शादी करानी थी दोनों की।

जिस जगह बुलाया था वहा पहोंच गए दोनों, अपने सूनहरे भविष्य की आस आँखों में संजोए हुए। पर ये क्या! सीमा का चचेरा भाई रोहित भाड़े के गुंडों के साथ खड़ा था वहाँ। दोनों को यह बात समजते देर नहीं लगी की उनके साथ छल हुआ है। पर अब भागना नहीं चाहते थे दोनों। कहा जाते भागके? जब अपने ही जान के प्यासे बन बेठे हो।

दोनों ने एकदूसरे के सामने देखा और मन ही मन मानो वह एक दूसरे को कह रहे हो की अब वो कसम पूरी करने का वक्त आ गया है जिसमे हम साथ में जी न सके पर मौत ही सही। कम से कम हमको हमारी मौत से तो जुदा नही कर पाएंगे न यह लोग।

रोहित सीमा को ये कह के जहर की बोतल थमाता है की अगर वीर से सच्चा प्यार है तो पिलो ये ज़हर। कुछ ही देर में वो जहर सीमा के शरीर में था और सीमा ज़मीन पे। अब बारी वीर की थी। पर उसे इतनी आसान मौत कहा नसीब थी भला। वीर को गाड़ी के पीछे बांध के तब तक घसीटा जाता है जब तक वो अपनी सीमा के पास नहीं पहोच गया। यह कहानी सच्ची घटना पे आधारित है।

गुस्सा आता होगा ना रोहित और उनके गुंडों पर? पर रुकिए जरा, क्या सिर्फ वहीँ लोग गुनहगार है क्या? हमारी घटिया सोच भी जिमेदार नहीं है क्या? जो प्यार को पवित्र मानने की जगह सिर्फ संकुचित नजर से ही देखा जाता है।

हम वही लोग है जो किशन कनैया की उन बातो का पाठ करते है जिसमे राधाजी है, रुक्मणीजी का हरण है, गोपिया है। और मानते है इन सब चीजो का पाठ करने से हमारे सारे पाप वैसे धूल जायेंगे, जैसे सर्फ एक्सेल से हमारे गंदे कपडे!

हम उन सब शक्तिपीठ का पूजन करते है, जहा जहा माँ गौरी के टुकड़े उस वक्त गिरे थे जब प्रभु शिव शंकर माँ गौरी के मृत्यु के गम मे उसे उठा क़र हिमालय ले जा रहे थे।
हमारा गुजरा हुआ कल तो काफी भव्य था प्यार करने वालो के लिए। पता नहीं ये गंदकी वर्त्तमान में कहा से आ गई।
कमी हमारी सौच में है। हम बस दिखावा करना जानते है। दरअसल हमारा समाज दंभी है। जी हा बिलकुल सही बोला है मैने। हम बस दुसरो को दिखाना चाहते है की हम कितने पाक साफ है। पर मन में तो कुछ और ही होता है।

इन प्यार के ज्यादातर मामलो में लड़के या लड़की के माता पिता को ज्यादा आपत्ति नही होती है। पर समाज क्या कहेगा या हमारे रिश्तेदारो को क्या मुह दिखाएंगे ये सोच कर ही मामला बिगड़ जाता है। अरे भाई ये समाज है क्या चीज? दिनेश, रमेश, सुरेश या इन जैसे लोगों का वो समुह जिस का काम सिर्फ गपे लड़ना हो। और हम उनसे डरते है।

और हैरानी की बात तो यह है की यही समाज, पता नहीं उस वक्त कहा चला जाता है? जबी honour killing की घटनाए सामने आती है।

हम पश्चिमी संस्कृति को काफी कोसते रहते है। पर एक बात है, वह लोग जैसे है वैसे ही दिखाई देते है। उसकी कई बाते हमें काफी बोल्ड लगती है पर  अच्छा है दम्भ नहीं है।

सोच ही है जो हमारे उनके बिच का फर्क है। वरना कभी हम भी सोने की चिड़िया हुआ करते थे। सोच बदलो देश बदलो।

धन्यवाद। जय हिन्द।

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